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साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। 

अनुष्ठान के दौरान दिनचर्या नियमित रखें और आलस्य से बचें।

हमारे हिंदू धर्म में ऐसी कई प्राचीन तांत्रिक साधना और मंत्रों का उल्लेख है, जिनके द्वारा व्यक्ति असंभव से असंभव काम को भी कर सकता है

सिद्ध हो जाता है तब क्या होता है? यह तो सवाल आपके मन में जरूर होंगे तो चलो इस बारे में बताते हैं।

ॐ काला भैरू, कपिला केश। काना कुंडल भगवा वेष।

साधना में बताए गये अनुष्ठान के दिनों तक बिना आलस्य के  प्रतिदिन जप अवश्य करें। 

रोग निवारण: शाबर मंत्रों का उपयोग भूत-प्रेत बाधा, मानसिक तनाव, और शारीरिक रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है।

जियति संचारे। किलनी पोतनी। अनिन्तुश्वरि करे।

❤ इसे और लोगो (मित्रो/परिवार) के साथ शेयर करे जिससे वह भी जान सके और इसका लाभ पाए ❤

गुरु के सिवा किसी भी अन्य व्यक्ति से साधना सम्बन्धी कोई बात न करें। 

ॐ गुरु जी कहे, चेला सुने, सुन के मन में गुने, नव ग्रहों का मंत्र, जपते पाप काटेंते, जीव मोक्ष पावंते, रिद्धि सिद्धि भंडार भरन्ते, ॐ आं चं मं बुं गुं शुं शं रां कें चैतन्य नव्ग्रहेभ्यो नमः

ॐ मोसिद्धि गुरुपराय स्वीलिंग। महादेव की आज्ञा।

” ॐ भगवती भग भाग दायिनी देव दत्तीं मम वश्यं कुरु कुरु स्वाहा ”

भोजन और आहार में संयम:- साधना के दौरान मांस, here मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का त्याग करें। सात्विक आहार ग्रहण करें।

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